| कोलकाता में 5.1 तीव्रता का भूकंप (AI Generated) |
कोलकाता भूकंप 2025: पूरी जानकारी
2025 में कोलकाता के लोगों ने अचानक धरती हिलती महसूस की, जिससे पूरे शहर में हलचल मच गई। इस भूकंप की तीव्रता 5.1 रिक्टर स्केल मापी गई और इसका केंद्र बंगाल की खाड़ी में था, जो कोलकाता से दूर है लेकिन उसका असर शहर तक महसूस हुआ। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप का समय सुबह 6:10 बजे के आस-पास था, जबकि इसकी गहराई 91 किलोमीटर थी। विशेषज्ञों का मानना है कि गहरे केंद्र का भूकंप आमतौर पर सतह पर कम असर दिखाता है, फिर भी लोगों के बीच घबराहट जरूर हुई। अच्छी खबर यह रही कि किसी तरह की क्षति या जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है।
भूकंप की पृष्ठभूमि और सेफ्टी पहलू
कोलकाता सिस्मिक ज़ोन III में आता है, यानी यहाँ मध्यम स्तर का भूकंप जोखिम रहता है। शहर हिमालय और उत्तर-पूर्व भारत की तुलना में कम संवेदनशील है, लेकिन बंगाल की खाड़ी या नेपाल जैसे केंद्रो से सक्रियता महसूस हो सकती है। हाल के वर्षों में अक्सर कोलकाता में हल्के-मध्यम तीव्रता के झटके महसूस किए गए हैं, जिससे शहर की भूकंप संबंधी सतर्कता आवश्यक हो गई है। लगातार आते हल्के भूकंप प्लेटों के तनाव को कम कर सकते हैं, लेकिन यह भी संकेत हो सकता है कि भविष्य में बड़ा झटका आ सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, शहर में पुरानी इमारतें और नर्म जमीन भूकंप के समय ज्यादा कमजोर हो सकती हैं।
प्रभाव: लोगों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर
इस बार के भूकंप में कोलकाता और आसपास के इलाकों में घबराहट जरूर देखी गई, लेकिन न तो किसी इमारत को नुकसान पहुंचा, न मानव हानि हुई। सरकारी एजेंसियों की ओर से बेहद तेजी से अलर्ट जारी किया गया और लोगों को घरों से बाहर सुरक्षित जगह पहुंचने को कहा गया। कहा जा सकता है कि शहर की आपदा प्रबंधन प्रणाली ने ठीक तरीके से काम किया।
भूकंप मुख्य तौर पर बंगाल की खाड़ी के किनारे, उत्तर और पूर्वी कोलकाता, रांची, और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में महसूस हुआ। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बार-बार छोटे झटके भविष्य में ज्यादा ताकतवर भूकंप का संकेत हो सकते हैं, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।
सामान्य प्रश्न (FAQs)
- कोलकाता में कब-कब भूकंप आया? 2025 में फरवरी के माह में 5.1 तीव्रता तथा नवंबर में 3.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ हैं, जिसमें कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
- कोलकाता सिस्मिक जोन कौन सा है? कोलकाता सिस्मिक जोन III में आता है, जो मध्यम श्रेणी का भूकंप जोन माना जाता है।
- क्या बार-बार छोटे भूकंप बड़े झटकों की चेतावनी हैं? विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार प्लेट मूवमेंट और लघु झटके बड़े भूकंप आने की संभावना को कम कर सकते हैं, लेकिन पूरी तरह से आश्वस्त भी नहीं किया जा सकता।
- भूकंप के समय क्या करें? भूकंप के समय खुले स्थान पर जाएं, ऊँची इमारतों या बिजली के खंभों से दूर रहें, और सीढ़ियों की बजाय लिफ्ट का प्रयोग कतई न करें।
भविष्य की संभावनाएँ और तैयारी
कोलकाता के लिए बड़े भूकंप की संभावना कम है, लेकिन पूरी तरह से इंकार भी नहीं किया जा सकता। लगातार हल्के झटके यह दर्शाते हैं कि इलाके की टेक्टोनिक प्लेटें सक्रिय हैं। प्रशासन ने आपातकालीन मॉक ड्रिल्स, जागरूकता कैंप और सार्वजनिक सूचना तंत्र को सशक्त किया है। IIT खड़गपुर जैसे संस्थानों ने भूकंप इंजीनियरिंग पर रिसर्च तेज कर दी है, जिससे भविष्य में और सुरक्षित निर्माण, पूर्व-चेतावनी सिस्टम और रेस्क्यू ऑपरेशन को बेहतर किया जा सके।
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